Saturday , 19 April 2014
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Latest Hindi Kavita & poems collection

Best Hindi Kavita & Love ghazals

साँस जाने बोझ कैसे जीवन का ढोती रही
नयन बिन अश्रु रहे पर ज़िन्दगी रोती रही।

एक नाज़ुक ख्वाब का अन्जाम कुछ ऐसा हुआ
मैं तड़पता रहा इधर वो उस तरफ रोती रही।

भूख , आँसू और गम़ ने उम्र तक पीछा किया
मेहनत के रूख़ पर ज़र्दियाँ , तन पे फटी धोती रही।

उस महल के बिस्तरे पर सोते रहे कुत्ते बिल्लियाँ
धूप में पिछवाड़े एक बच्ची छोटी सोती रही।

आज तो उस माँ ने जैसे तैसे बच्चे सुला दिये
कल की फ़िक्र पर रात भर दामन भिगोती रही।

तंग आकर मुफ़लिसी से खुदखुशी कर ली मगर
दो गज़ कफ़न को लाश उसकी बाट जोहती रही।

`जितमोहन’ बशर की ख्वाहिशों का कद इतना बढ़ गया
ख्व़ाहिशों की भीड़ में कहीं ज़िन्दगी रोती रही।

Latest True Hindi Kavita Collection

शक्ल हो बस आदमी का क्या यही पहचान है।
ढूँढ़ता हूँ दर-ब-दर मिलता नहीं इन्सान है।।

घाव छोटा या बडा एहसास दर्द का एक है।
दर्द एक दूजे का बाँटें तो यही एहसान है।।

अपनी मस्ती राग अपना जी लिए तो क्या जीए।
जिंदगी, उनको जगाना हक से भी अनजान है।।

लूटकर खुशियाँ हमारी अब हँसी वे बेचते।
दीख रहा, वो व्यावसायिक झूठी सी मुस्कान है।।

हार के भी अब जितमोहन का हार की चाहत उन्हें।
ताज काँटों का न छूटे बस यही अरमान है।।

Hindi Kavita

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